नैना ने सिर उठाकर देखा। उसकी आंखों में एक समंदर बयानी कर रहा था। उसने कहा, "मैं जा रही हूं... खुद से दूर। यह शहर मुझे सांस नहीं लेने देता। हर गली में वो यादें हैं जिन्हें मैं भूलना चाहती हूं, लेकिन यह शहर मुझे भूलने नहीं देता।"
Musafir Café में आपका स्वागत है — एक ऐसी जगह जहाँ हर कप चाय एक कहानी कहता है और हर मुसाफिर का दिल यहाँ रुककर घर सा महसूस करता है। musafir cafe hindi exclusive
एक बार की बात है, बारिश की एक ऐसी रात थी जब आसमान ज़मीन से मिलता नज़र आ रहा था। कैफे का दरवाज़ा खटखटाया। अंदर एक लड़की दाखिल हुई। उसके कपड़े गीले थे, आंखें लाल थीं, और उसके हाथ में एक पुराना, थका हुआ सूटकेस था। वह 'नैना' थी। आंखें लाल थीं